शनि ग्रह सबसे मन्दगामी ग्रह है। 1 जनवरी 2013 को यह तुला राशि के 12वें अंश में होगा। शनि की मन्द गति से चलने की रफ्तार 10 मार्च को रुक जाएगी। यह तुला राशि के 18वें अंश में वक्री होगा। वहां से वक्री चलता हुआ शनि पूरे अप्रैल, मई, जून तथा 6 जुलाई को यह तुला राशि के 11वें अंश में मार्गी होगा। उसके उपरान्त वर्ष के अन्त तक शनि ग्रह तुला राशि के 27वें अंश में अपनी मन्दगति से यात्रा आरंभ करेगा। विशेष बात यह होगी कि इस वर्ष भी शनि की साढ़ेसाती कन्या, तुला और वृश्चिक राशि को यथावत जारी रहेगी। साढ़ेसाती का फल विचार हम नीचे दे रहे हैं। इसके अनुसार कन्या राशि को उतरती साढ़ेसाती रहेगी। तुला राशि को भोग में मध्य साढ़ेसाती रहेगी। जबकि वृश्चिक राशि को सिर पर चढ़ती साढ़ेसाती रहेगी। साढ़ेसाती के दौरान कन्या तुला तथा वृश्चिक राशि वालों को शारीरिक मानसिक तथा आर्थिक परेशानियों के अलावा शत्रु आदि का भय भी रहेगा। गुप्त चिन्ताएं रहेंगी। हर महत्वपूर्ण कार्य में विलम्ब और बाधा आएगी। दिमाग पर हमेशा निराशा का बोझ रहेगा। मान-सम्मान की हानि तथा समाज और सरकार में बदनामी या लज्जित होने के अवसर भी आएंगे। नौकरी अथवा कारोबार में आरोप-लांछन भी लग सकते हैं। भोग-विलास और अवांछित कार्यों से पीछा नहीं छूट पाएगा। सट्टेबाजी या दुर्बुद्धि के कारण संचित धन का नुकसान होगा। इसके अलावा कर्म के अनुसार शनि की साढ़ेसाती में इसके अच्छे और बुरे फल भोगने को तैयार रहना पड़ेगा। यह भी कहते है कि शनि अपनी गोचर साढ्रेसाती के दौरान हर पिछले अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब लेता है। सत्कर्मी को बख्श देता है और कुकर्मी को सजा देता है। हर तीस साल में प्रत्येक जातक को शनि महाराज के आगे हाजिर होना पड़ता है।
ऐसा नहीं कि शनि की साढ़ेसाती सभी राशियों को एक समान फल देती है। जिनका जन्मकालीन शनि योग कारक होता है उनके लिए साढ़ेसाती का दौर एक बेहतरीन और सुनहरा मैदान तैयार करता है। उनमें रात-दिन परिश्रम करने की शक्ति और युक्ति का संचार होता है। जिन महानुभावों का शनि खराब है, उनके लिए साढ़ेसाती बहुत ही खराब होती है। उनकी जबान कड़वी हो जाती है। काम से जी चुराते हैं। इसी कारण शनि की महादशा और साढ़ेसाती सभी आलसी और निकम्मे लोगों पर बुरा असर डालती है। शुद्ध और पवित्र आचरण से जीवनयापन करने वाले चरित्रवान लोगों पर भी शनि का कुछ दुष्प्रभाव जरूर होता है, लेकिन समयानुसार उन्हें अपने कष्ट से मुक्ति भी मिल जाती है। जिन महानुभावों का जन्मजात शनि उनकी जन्मकुंडली में योगकारक और अच्छा है, उनको यह साढ़ेसाती बहुत ही लाभप्रद सफलतादायक और राजयोग कारक भी होगी। फिर भी शनि की गोचर स्थिति कम या ज्यादा सभी को ही थोड़ा-थोड़ा सुख और दुख का स्वाद देने वाली जरुर होती है। वर्ष 2013 में स्वाति और विशाखा नक्षत्र में शनि का गोचर चल रहा है। नक्षत्रों के अनुसार भी शनि का प्रभाव दूसरे, चौथे, छठे, आठवें और नवें नक्षत्र वालों को विशेष योगकारक हो जाती है। अच्छा शनि राजनीति सरकार या बहुराष्ट्रीय संस्थाओं में पदलाभ देता है। भूमि-जायदाद का लाभ होता है। मुकदमे में जीत होती है या फिर शेयर मार्केट व सट्टे आदि में अच्छा लाभ मिलता है। लेकिन आज के समय में शनि का यह प्रभाव उन लोगों पर ज्यादा होता है, जो अवांछित कार्यो में संलिप्त भी रहते हैं। सत्य और ईमानदार व्यक्ति को शनि पैसे-पैसे के लिए मोहताज रखता है और तिल-तिल करके जीने को मजबूर भी करता है, लेकिन इसको ईश्वर का इन्साफ मानकर झेलने की ताकत भी सभी में आ जाती है
Pandit Ji hame ghar banana hai, hamare pas koi saman bhi nahi hai ki bech ke paise jama kare, loan bhi nahi mil raha, koi udar bhi nahi de raha, kripya koi upaye bataye...?
sastriji charan sparsh, shrimanji mere kam nahi ban pate hai jo bhi kam karta hu ulta hi ho jata hai,koi upay nahi suz raha hai,kripya meri samsya ka samadhan kare.
Gopendra Ji, Aapko Man Sirf Usi kam me lagana Ujit hoga ,jisko aap us Samay per ker rahe ho,Man ka Yaha Waha bhatkaw hone ki Pragati hoti hai,Aapke liye mera sujhaw hai ki Man Me thahraw Laye,Kaam Banega,Yog Aur Dhan Ka Sahra Le. Dhanyabad
shastri ji, yog ata nahi hai dhan hai nahi ab main kya karu koi upay batayen jisse meri samsya ka samadhan ho sake or mere graho ka klesh khatm ho jaye, apke uttar ke intzar main ,krapya mera margdharshan kare. dhanywad
स्नान के बाद श्री गणेश की पूजा गंध, अक्षत, सिंदूर, जनेऊ, दूर्वा, फूल चढ़ाकर करें। धूप और घी का दीप जलाकर नीचे लिखें सरल मंत्रों का श्रद्धा से स्मरण कामनासिद्धि और चिंतामुक्ति की कामना से करें -
पूजा और मंत्र जप के बाद मावे-मिश्री लड्डू का श्री गणेश को भोग लगाएं। यथासंभव सपरिवार श्रीगणेश की आरती करें। आरती और प्रसाद ग्रहण कर शुभ और मंगल की प्रार्थना करें।
Your Questions is not completed,sabka apna -2 Bhagya Hota hai,to bhi aapko mai kuch suggest karna chahuga -----
आज युवाओं के बीच सबसे अधिक चिंता का विषय आजीविका है.चिंता के इस विषय का समाधान ज्योतिष विधि से किया जाए तो मुश्किल काफी हद तक आसान हो सकती है.ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार हमारी कुण्डली में सब कुछ लिखा है बस उसे गहरी से जानने की आवश्यकता है.आइये जानें क्या कहती है कुण्डली कैरियर के बारे में.
आजीविका और कैरियर के विषय में दशम भाव को देखा जाता है (Tenth Bhava is for Career).दशम भाव अगर खाली है तब दशमेश जिस ग्रह के नवांश में होता है उस ग्रह के अनुसार आजीविका का विचार किया जाता है.द्वितीय एवं एकादश भाव में ग्रह अगर मजबूत स्थिति में हो तो वह भी आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार व्यक्ति की कुण्डली में दशमांश शुभ स्थान पर मजबूत स्थिति में होता है (Strongly placed tenth lord) तो यह आजीविका के क्षेत्र में उत्तम संभावनाओं का दर्शाता है.दशमांश अगर षष्टम, अष्टम द्वादश भाव में हो अथवा कमज़ोर हो तो यह रोजी रोजगार के संदर्भ में कठिनाई पैदा करता है.
जैमिनी पद्धति के अनुसार व्यक्ति के कारकांश कुण्डली में लग्न स्थान में सूर्य या शुक्र होता है तो व्यक्ति राजकीय पक्ष से सम्बन्धित कारोबार करता है अथवा सरकारी विभाग में नौकरी करता है.कारकांश में चन्द्रमा लग्न स्थान में हो (Moon in Ascendant in Karakamsh Kundali) और शुक्र उसे देखता हो तो इस स्थिति में अध्यापन के कार्य में सफलता और कामयाबी मिलती है.कारकांश में चन्द्रमा लग्न में होता है और बुध उसे देखता है तो यह चिकित्सा के क्षेत्र में कैरियर की बेहतर संभावनाओं को दर्शाता है.कारकांश में मंगल के लग्न स्थान पर होने से व्यक्ति अस्त्र, शस्त्र, रसायन एवं रक्षा विभाग से जुड़कर सफलता की ऊँचाईयों को छूता है.
कारकांश लग्न में जिस व्यक्ति के बुध होता (Mercury in Ascendant of Karakamsh Kundali) है वह कला अथवा व्यापार को अपनी आजीविका का माध्यम बनता है तो आसानी से सफलता की ओर बढ़ता है.कारकांश में लग्न स्थान पर अगर शनि या केतु है तो इसे सफल व्यापारी होने का संकेत समझना चाहिए.सूर्य और राहु के लग्न में होने पर व्यक्ति रसायनशास्त्री अथवा चिकित्सक हो सकता है.
ज्योतिष विधान के अनुसार कारकांश से तीसरे, छठे भाव में अगर पाप ग्रह स्थित हैं या उनकी दृष्टि है तो इस स्थिति में कृषि और कृषि सम्बन्धी कारोबार में आजीविका का संकेत मानना चाहिए.कारकांश कुण्डली में चौथे स्थान पर केतु (Ketu in fourth house of Karakamsh Kundali) व्यक्ति मशीनरी का काम में सफल होता है.राहु इस स्थान पर होने से लोहे से कारोबार में कामयाबी मिलती है.कारकांश कुण्डली में चन्द्रमा अगर लग्न स्थान से पंचम स्थान पर होता है और गुरू एवं शुक्र से दृष्ट या युत होता है तो यह लेखन एवं कला के क्षेत्र में उत्तमता दिलाता है.
कारकांश में लग्न से पंचम स्थान पर मंगल (Mars in fifth house of Karakamsh Kundali) होने से व्यक्ति को कोर्ट कचहरी से समबन्धित मामलों कामयाबी मिलती है.कारकांश कुण्डली के सप्तम भाव में स्थित होने से व्यक्ति शिल्पकला में महारत हासिल करता है और इसे अपनी आजीविका बनाता है तो कामयाब भी होता है.करकांश में लग्न से पंचम स्थान पर केतु व्यक्ति को गणित का ज्ञाता बनाता है.
pandit ji mere rashi per shani ki 7 1/2 chl rahi h to kripa kar ak ye bataye ki ise dur kise kiya jaye
ReplyDeleteशनि ग्रह सबसे मन्दगामी ग्रह है। 1 जनवरी 2013 को यह तुला राशि के 12वें अंश में होगा। शनि की मन्द गति से चलने की रफ्तार 10 मार्च को रुक जाएगी। यह तुला राशि के 18वें अंश में वक्री होगा। वहां से वक्री चलता हुआ शनि पूरे अप्रैल, मई, जून तथा 6 जुलाई को यह तुला राशि के 11वें अंश में मार्गी होगा। उसके उपरान्त वर्ष के अन्त तक शनि ग्रह तुला राशि के 27वें अंश में अपनी मन्दगति से यात्रा आरंभ करेगा। विशेष बात यह होगी कि इस वर्ष भी शनि की साढ़ेसाती कन्या, तुला और वृश्चिक राशि को यथावत जारी रहेगी। साढ़ेसाती का फल विचार हम नीचे दे रहे हैं। इसके अनुसार कन्या राशि को उतरती साढ़ेसाती रहेगी। तुला राशि को भोग में मध्य साढ़ेसाती रहेगी। जबकि वृश्चिक राशि को सिर पर चढ़ती साढ़ेसाती रहेगी। साढ़ेसाती के दौरान कन्या तुला तथा वृश्चिक राशि वालों को शारीरिक मानसिक तथा आर्थिक परेशानियों के अलावा शत्रु आदि का भय भी रहेगा। गुप्त चिन्ताएं रहेंगी। हर महत्वपूर्ण कार्य में विलम्ब और बाधा आएगी। दिमाग पर हमेशा निराशा का बोझ रहेगा। मान-सम्मान की हानि तथा समाज और सरकार में बदनामी या लज्जित होने के अवसर भी आएंगे। नौकरी अथवा कारोबार में आरोप-लांछन भी लग सकते हैं। भोग-विलास और अवांछित कार्यों से पीछा नहीं छूट पाएगा। सट्टेबाजी या दुर्बुद्धि के कारण संचित धन का नुकसान होगा। इसके अलावा कर्म के अनुसार शनि की साढ़ेसाती में इसके अच्छे और बुरे फल भोगने को तैयार रहना पड़ेगा। यह भी कहते है कि शनि अपनी गोचर साढ्रेसाती के दौरान हर पिछले अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब लेता है। सत्कर्मी को बख्श देता है और कुकर्मी को सजा देता है। हर तीस साल में प्रत्येक जातक को शनि महाराज के आगे हाजिर होना पड़ता है।
ReplyDeleteऐसा नहीं कि शनि की साढ़ेसाती सभी राशियों को एक समान फल देती है। जिनका जन्मकालीन शनि योग कारक होता है उनके लिए साढ़ेसाती का दौर एक बेहतरीन और सुनहरा मैदान तैयार करता है। उनमें रात-दिन परिश्रम करने की शक्ति और युक्ति का संचार होता है। जिन महानुभावों का शनि खराब है, उनके लिए साढ़ेसाती बहुत ही खराब होती है। उनकी जबान कड़वी हो जाती है। काम से जी चुराते हैं। इसी कारण शनि की महादशा और साढ़ेसाती सभी आलसी और निकम्मे लोगों पर बुरा असर डालती है। शुद्ध और पवित्र आचरण से जीवनयापन करने वाले चरित्रवान लोगों पर भी शनि का कुछ दुष्प्रभाव जरूर होता है, लेकिन समयानुसार उन्हें अपने कष्ट से मुक्ति भी मिल जाती है। जिन महानुभावों का जन्मजात शनि उनकी जन्मकुंडली में योगकारक और अच्छा है, उनको यह साढ़ेसाती बहुत ही लाभप्रद सफलतादायक और राजयोग कारक भी होगी। फिर भी शनि की गोचर स्थिति कम या ज्यादा सभी को ही थोड़ा-थोड़ा सुख और दुख का स्वाद देने वाली जरुर होती है। वर्ष 2013 में स्वाति और विशाखा नक्षत्र में शनि का गोचर चल रहा है। नक्षत्रों के अनुसार भी शनि का प्रभाव दूसरे, चौथे, छठे, आठवें और नवें नक्षत्र वालों को विशेष योगकारक हो जाती है। अच्छा शनि राजनीति सरकार या बहुराष्ट्रीय संस्थाओं में पदलाभ देता है। भूमि-जायदाद का लाभ होता है। मुकदमे में जीत होती है या फिर शेयर मार्केट व सट्टे आदि में अच्छा लाभ मिलता है। लेकिन आज के समय में शनि का यह प्रभाव उन लोगों पर ज्यादा होता है, जो अवांछित कार्यो में संलिप्त भी रहते हैं। सत्य और ईमानदार व्यक्ति को शनि पैसे-पैसे के लिए मोहताज रखता है और तिल-तिल करके जीने को मजबूर भी करता है, लेकिन इसको ईश्वर का इन्साफ मानकर झेलने की ताकत भी सभी में आ जाती है
Pandit Ji hame ghar banana hai, hamare pas koi saman bhi nahi hai ki bech ke paise jama kare, loan bhi nahi mil raha, koi udar bhi nahi de raha, kripya koi upaye bataye...?
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ReplyDeleteArchna Ji,
ReplyDeleteaapke liye silder aapke Baye Haath me baithe Byakti se sampark karne per milne ki sambhawana hai.............
Dhanyabad
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ReplyDeleteArchna ji
sambhawnaye kam hai,man me shanti banaye rakhe ,Shankar ji ki Poojan kare Iski(salary) Jarurat nahi padegi.
------------------Dhanyabad
sastriji charan sparsh,
ReplyDeleteshrimanji mere kam nahi ban pate hai jo bhi kam karta hu ulta hi ho jata hai,koi upay nahi suz raha hai,kripya meri samsya ka samadhan kare.
Gopendra Ji,
ReplyDeleteAapko Man Sirf Usi kam me lagana Ujit hoga ,jisko aap us Samay per ker rahe ho,Man ka Yaha Waha bhatkaw hone ki Pragati hoti hai,Aapke liye mera sujhaw hai ki Man Me thahraw Laye,Kaam Banega,Yog Aur Dhan Ka Sahra Le.
Dhanyabad
shastri ji,
ReplyDeleteyog ata nahi hai dhan hai nahi ab main kya karu koi upay batayen jisse meri samsya ka samadhan ho sake or mere graho ka klesh khatm ho jaye,
apke uttar ke intzar main ,krapya mera margdharshan kare.
dhanywad
pandit ji mera system or mera net bahut din se band hai kripya koi upay bataye par upay aisa hona chahiye ki mera system or net turant chalne lage
ReplyDeleteApp Ko kisi Hardware Specialist ki jarurat hai,Shighr sampark kare
ReplyDeletehardware specialist b kuch nai kar pa rahe hai pandit ji keval ek matra aap hi sahara hai koi aisa mantra bataiye jisase system shighra chalne lage
ReplyDeleteस्नान के बाद श्री गणेश की पूजा गंध, अक्षत, सिंदूर, जनेऊ, दूर्वा, फूल चढ़ाकर करें। धूप और घी का दीप जलाकर नीचे लिखें सरल मंत्रों का श्रद्धा से स्मरण कामनासिद्धि और चिंतामुक्ति की कामना से करें -
Deleteॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नम:
ॐ हरये नम:
ॐ शान्ताय नम:
ॐ भक्तवांछितदायकाय नम:
ॐ ज्ञानिने नम:
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ अकल्माषय नम:
ॐ दूर्वाबिल्वप्रियाय नम:
ॐ बुद्धिप्रियाय नम:
ॐ भक्तविघ्रविनाशाय नम:
ॐ वक्रतुण्डाय हुम्
पूजा और मंत्र जप के बाद मावे-मिश्री लड्डू का श्री गणेश को भोग लगाएं। यथासंभव सपरिवार श्रीगणेश की आरती करें। आरती और प्रसाद ग्रहण कर शुभ और मंगल की प्रार्थना करें।
pndit ji when i will get my dream job??
ReplyDeleteYour Questions is not completed,sabka apna -2 Bhagya Hota hai,to bhi aapko mai kuch suggest karna chahuga -----
Deleteआज युवाओं के बीच सबसे अधिक चिंता का विषय आजीविका है.चिंता के इस विषय का समाधान ज्योतिष विधि से किया जाए तो मुश्किल काफी हद तक आसान हो सकती है.ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार हमारी कुण्डली में सब कुछ लिखा है बस उसे गहरी से जानने की आवश्यकता है.आइये जानें क्या कहती है कुण्डली कैरियर के बारे में.
आजीविका और कैरियर के विषय में दशम भाव को देखा जाता है (Tenth Bhava is for Career).दशम भाव अगर खाली है तब दशमेश जिस ग्रह के नवांश में होता है उस ग्रह के अनुसार आजीविका का विचार किया जाता है.द्वितीय एवं एकादश भाव में ग्रह अगर मजबूत स्थिति में हो तो वह भी आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार व्यक्ति की कुण्डली में दशमांश शुभ स्थान पर मजबूत स्थिति में होता है (Strongly placed tenth lord) तो यह आजीविका के क्षेत्र में उत्तम संभावनाओं का दर्शाता है.दशमांश अगर षष्टम, अष्टम द्वादश भाव में हो अथवा कमज़ोर हो तो यह रोजी रोजगार के संदर्भ में कठिनाई पैदा करता है.
जैमिनी पद्धति के अनुसार व्यक्ति के कारकांश कुण्डली में लग्न स्थान में सूर्य या शुक्र होता है तो व्यक्ति राजकीय पक्ष से सम्बन्धित कारोबार करता है अथवा सरकारी विभाग में नौकरी करता है.कारकांश में चन्द्रमा लग्न स्थान में हो (Moon in Ascendant in Karakamsh Kundali) और शुक्र उसे देखता हो तो इस स्थिति में अध्यापन के कार्य में सफलता और कामयाबी मिलती है.कारकांश में चन्द्रमा लग्न में होता है और बुध उसे देखता है तो यह चिकित्सा के क्षेत्र में कैरियर की बेहतर संभावनाओं को दर्शाता है.कारकांश में मंगल के लग्न स्थान पर होने से व्यक्ति अस्त्र, शस्त्र, रसायन एवं रक्षा विभाग से जुड़कर सफलता की ऊँचाईयों को छूता है.
कारकांश लग्न में जिस व्यक्ति के बुध होता (Mercury in Ascendant of Karakamsh Kundali) है वह कला अथवा व्यापार को अपनी आजीविका का माध्यम बनता है तो आसानी से सफलता की ओर बढ़ता है.कारकांश में लग्न स्थान पर अगर शनि या केतु है तो इसे सफल व्यापारी होने का संकेत समझना चाहिए.सूर्य और राहु के लग्न में होने पर व्यक्ति रसायनशास्त्री अथवा चिकित्सक हो सकता है.
ज्योतिष विधान के अनुसार कारकांश से तीसरे, छठे भाव में अगर पाप ग्रह स्थित हैं या उनकी दृष्टि है तो इस स्थिति में कृषि और कृषि सम्बन्धी कारोबार में आजीविका का संकेत मानना चाहिए.कारकांश कुण्डली में चौथे स्थान पर केतु (Ketu in fourth house of Karakamsh Kundali) व्यक्ति मशीनरी का काम में सफल होता है.राहु इस स्थान पर होने से लोहे से कारोबार में कामयाबी मिलती है.कारकांश कुण्डली में चन्द्रमा अगर लग्न स्थान से पंचम स्थान पर होता है और गुरू एवं शुक्र से दृष्ट या युत होता है तो यह लेखन एवं कला के क्षेत्र में उत्तमता दिलाता है.
कारकांश में लग्न से पंचम स्थान पर मंगल (Mars in fifth house of Karakamsh Kundali) होने से व्यक्ति को कोर्ट कचहरी से समबन्धित मामलों कामयाबी मिलती है.कारकांश कुण्डली के सप्तम भाव में स्थित होने से व्यक्ति शिल्पकला में महारत हासिल करता है और इसे अपनी आजीविका बनाता है तो कामयाब भी होता है.करकांश में लग्न से पंचम स्थान पर केतु व्यक्ति को गणित का ज्ञाता बनाता है.
panditji aapka bahut bahut dhanyavad aapke karan mera net or system dono chalne lage
ReplyDeletepandit ji mujhe aaj ka rashifal dekhna h kripya jald hi update kare
ReplyDeleteYou May See Your HOROSCOPE
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